WhatsApp New Feature: वाट्सएप का ये नया फीचर जल्द होने जा रहा लॉन्च, जो फेक न्यूज़ को रोकेगा

WhatsApp New Feature: मिसइनफॉर्मेशन कॉम्बैट अलायंस और मेटा ने व्हाट्सएप पर फैक्ट चेक हेल्पलाइन नंबर (Fact Checking Helpline on WhatsApp) प्राप्त करने का एलान किया है। मेटा ने बताया कि चैटबॉट अंग्रेजी के अलावा हिंदी, तमिल और तेलुगु जैसी तीन स्थानीय भाषाओं में काम करेगा।

सोशल मीडिया पर डीपफेक कंटेंट की समस्या और गलत जानकारी को रोकें के लिए वॉट्सऐप ने एक नया कदम उठाया है। जल्द ही वॉट्सऐप एक नया फीचर लाने की तैयारी में है, जिससे चैटबॉट की मदद से AI द्वारा जेनरेट किए गए डीपफेक कॉन्टेंट की पहचान करने में मदद मिलेगी।

भ्रामक कंटेंट पर लगेगी रोक

मिसइनफॉर्मेशन कॉम्बैट अलायंस और मेटा ने व्हाट्सएप पर फैक्ट चेक हेल्पलाइन नंबर उपलब्ध कराने का ऐलान किया है। इससे भ्रामक कंटेंट पर रोक लगेगी। फैक्ट चेक हेल्पलाइन नंबर अगले महीने लॉन्च होगा। सचिन तेंदुलकर, अमिताभ बच्चन, आलिया भट्ट, रश्मिका मंदाना और कई अन्य सेलिब्रिटी डीपफेक का शिकार हो चुके हैं।

कई भाषाओं में मिलेगा सपोर्ट 

WhatsApp चैटबॉट बहुत सारी भाषाओं का समर्थन करेगा। इसमें अंग्रेजी के अलावा तीन अन्य स्थानीय भाषाओं का समर्थन भी होगा। आप इसके माध्यम से AI Deepfake की रिपोर्ट कर सकेंगे। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उपयोगकर्ताओं को हेल्पलाइन पर एक संदेश भेजना होगा। इसके बाद सिस्टम अपना काम करेगा और आपको जानकारी देगा।

आईये अब हम जानें कि डीपफेक क्या होता है, इसका कैसे उपयोग किया जाता है, इसके क्या खतरे हैं और कैसे हम इससे बच सकते हैं।

डीपफेक क्या है?

डीपफेक (Deepfake) एक प्रकार की कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) तकनीक है। इसका उपयोग नकली वीडियो और ऑडियो बनाने के लिए किया जाता है। यह तकनीक मानवों को एक ऐसी चीज़ दिखा सकती है और उनके मुंह से ऐसी बातें निकलवा सकती है, जो उन्होंने वास्तविकता में कभी कहीं नहीं हैं।

डीपफेक का काम करने का तरीका क्या होता है?

डीपफेक दो मुख्य AI तकनीकों का उपयोग करता है।

  • जेनरेटिव एडवरसैरियल नेटवर्क (GAN): यह एक प्रकार का एआई है जो दो न्यूरल नेटवर्क, जनरेटर और डिस्क्रिमिनेटर के बीच प्रतिस्पर्धा पर आधारित है। जनरेटर नकली वीडियो और ऑडियो बनाता है, जबकि डिस्क्रिमिनेटर यह निर्धारित करने का प्रयास करता है कि वे वास्तविक हैं या नकली।
  • ऑटो-एनकोडर: यह एक प्रकार का AI है जो डेटा को एक छोटे आकार में एन्कोड करता है और फिर उसे मूल डेटा के समान बनाने के लिए डिकोड करता है। डीपफेक में, चेहरे के भावों और आवाज की टोन जैसी डेटा को एन्कोड करने के लिए ऑटो-एनकोडर का उपयोग किया जाता है और फिर यह नकली वीडियो और ऑडियो बनाने के लिए वह डेटा उपयोग करता है।

डीपफेक का उपयोग क्या है?

  • मनोरंजन: डीपफेक का उपयोग आप फिल्मों, टीवी शो और वीडियो गेम में खास प्रभाव बनाने के लिए कर सकते हैं।
  • शिक्षा: डीपफेक का उपयोग आप ऐसे विषयों को सिखाने के लिए कर सकते हैं जैसे कि इतिहास या विज्ञान।
  • व्यवसाय: डीपफेक का उपयोग आप विपणन और बिक्री के लिए कर सकते हैं।
  • समाचार: डीपफेक का उपयोग आप नकली समाचार बनाने के लिए कर सकते हैं।

डीपफेक के नुकसान क्या है?

  • ग़लत जानकारी: डीपफेक का उपयोग ग़लत जानकारी और प्रचार के लिए किया जा सकता है।
  • धोखाधड़ी: डीपफेक का उपयोग लोगों को धोखा देने के लिए किया जा सकता है, जैसे कि पहचान की चोरी या धोखाधड़ी।
  • गहराई में: डीपफेक का उपयोग लोगों की भावनाएं बदलने के लिए किया जा सकता है।

डीपफेक का पता कैसे लगाए?

  • चेहरे और आवाज के मेलजोल में समस्या: एक व्यक्ति के चेहरे और आवाज में मेलजोल नहीं होने की स्थिति में, उसे डीपफेक कहा जा सकता है।
  • वीडियो में अस्थायी एनिमेशन: यदि किसी वीडियो में एनिमेशन अस्थायी या अवास्तविक लगती है, तो वह डीपफेक हो सकती है।
  • अस्पष्ट या गायब पृष्ठभूमि: वीडियो में पृष्ठभूमि अस्पष्ट या गायब होने की स्थिति में, वह डीपफेक हो सकती है।

डीपफेक से बचाव कैसे करे?

  • विश्वसनीय स्रोतों से सही जानकारी प्राप्त करें: आपको सही जानकारी के लिए विश्वसनीय स्रोतों से ही जांच पड़ताल करें, और किसी वीडियो या ऑडियो को साझा करने से पहले उसकी सत्यता की जांच करें।
  • डीपफेक के संकेतों पर ध्यान दें: डीपफेक के संकेतों को पहचानें और यदि आपको कोई संदेह हो तो किसी वीडियो या ऑडियो की सत्यता की जाँच करें।
  • अपनी गोपनीयता संरक्षित रखें: अपनी गोपनीयता का ख्याल रखें और आपकी व्यक्तिगत जानकारी को ऑनलाइन साझा करने से बचें।

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